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INTERVIEW: मेरी डेब्यू फिल्म है सफलता तो मुझे भी चाहिए है – मुस्तफा बर्मावाला

फ़िल्मी इंटरव्यू

लिपिका वर्मा

मुस्तफा बर्मावाला स्टार किड  जरूर है लेकिन उन्होंने  विदेश से फिल्म-मेकिंग की अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने चाचा मुस्तान और पापा अब्बास के साथ न केवल एक फिल्म में- किन्तु तीन -तीन फिल्मों में बतौर सहायक निर्देशक काम भी किया है। फिल्म ‘रेस-2’ में दो भूमिकायें निभा कर उन्होंने  यह साबित कर दिया था कि -उनमें निर्देशन एवं अभिनय का जबरदस्त कीड़ा है। , ‘रेस-2’ में सहायक निर्देशक काम किया है एवं बिपाशा बसु के साथ एक सीन में कैमियो करते हुए भी नजर आए है। उनका आत्मविश्वास एवं मनोबल जहाँ निर्देशन की  बागडोर संभालने में और अभिनय करने में भरपूर देखा गया है -वह काबिले तारीफ है। मुस्तफा एक संयुक्त परिवार में पले बड़े हुए है। जाहिर सी बात है उनमें अपने परिवार की एकजुटता पर न केवल गर्व है किन्तु उनका मानना है कि -उनके शब्दकोष में, ‘चचेरा  भाई’ जैसा कोई शब्द नहीं है। वह सबको एक ही परिवार का मानते हैं। आज के जमाने में ऐसी भावना रखने वाले बच्चे बहुत कम पाए जाते है। दरअसल इसमें उनकी परवरिश का एक बहुत बड़ा हाथ है जिसे अब्बास मुस्तान ने आज भी कायम रखा है। मुस्तफा बहुत ही जमीं से जुड़ा हुआ व्यक्तित्व रखते हैं। .. आज के यूथ के लिए ऐसे बच्चे प्रेरणा स्तोत्र माने जाने चाहिए –

पेश है मुस्तफा के साथ लिपिका वर्मा की बातचीत के कुछ अंश

आप फिल्म ‘मशीन’ में बतौर हीरो लांच किये जा रहे हैं क्या कहना चाहेंगे आप ?

बस मैं यही कहना चाहूंगा कि – स्टार -किड  होने हेतु मुझे अपना 200 प्रतिशत देना होगा। मैं यह भी जानता हूँ कि अब्बास-मुस्तान सर ने कड़ी मेहनत और मशक्त के बाद यह पदवी पायी है। बॉलीवुड में पैर जमाना कोई आसान काम नहीं है। और तो और उनकी फिल्मों में, आज के जाने-माने  हीरो-अक्षय कुमार, अक्षय खन्ना, शाहरुख खान  एवं बॉबी देओल, जॉन अब्राहम, सैफ अली खान इत्यादि ने उनके साथ काम किया है और हिट फिल्में भी दी है। सो मुझे भी इंडस्ट्री के लोगो की आशा पर खरा उतरना होगा।Mustafa-burma

स्टार किड होने का दबाब भी महसूस कर रहे होंगे? क्या कहना चाहेंगे ? 

यह सचमुच बहुत बड़ा प्रश्न होता है। दरअसल में, मुझे यह फिल्म बड़ी मशक्त करने के बाद ही मिली है। किन्तु लोगों को लगेगा कि इसके पिताजी बॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक-निर्माता है इसलिए मुस्तफा को उन्होंने आसानी से फिल्म ‘मशीन’ में काम दे दिया होगा? लेकिन ऐसा नहीं है।

हाँ तो हमें यह बताइये यह फिल्म आप को कैसे मिली?

मैंने अब्बास-मस्तान सर की एक नहीं तीन- तीन फिल्मों में बतौर सहायक निर्देशक काम किया है। रेस 2, प्लेयर्स, और किस किस को प्यार करें। … ‘रेस 2’ में बिपाशा बसु के साथ मैंने एक कैमियो निभाया है। सह -निर्देशक बनकर मैंने हमेशा से अभिनेताओं को अभिनय कर सीन को समझाया है। और यह बात अब्बास-मस्तान सर जानते थे। इस फिल्म ‘मशीन’ में भी में सह-निर्देशक ही काम कर रहा था। किन्तु मेरे भाई ने जब उन्हें बताया कि आप न्यू कमर ढूंढ रहे हैं तो क्यों न मुस्तफा को ही लॉन्च करें? वह भी इच्छा रखता है कि इस फिल्म में अभिनय कर पाए। तब एक दिन अब्बास मस्तान सर ने मुझे बुलाया और मुझसे कहा -तुम हमें पूरी कहानी को अभिनय करके दिखा सकते हो क्या? तब तक मुझे नहीं पता था कि यह एक तरह से मेरी अभिनय शक्ति को मापा जा रहा था। खैर मैंने बतौर सह निर्देशक ऐसा ही किया है सो -हाथ कंगन को आरसी क्या…. ?? बस मैंने तुरन्त ही अभिनय कर उन्हें सारी स्क्रिप्ट नरेट कर दी। और उस दिन सारे ऑफिस के कर्मचारी भी मौजूद थे। जिन्हें पता था कि मेरा इम्तिहान हो रहा है किन्तु उन्हें हिदायत दी गयी थी- मुझ पर जाहिर न किया जाये? बस फिर क्या था सभी के पूछने पर यही कहा कि मुस्तफा ने बहुत बेहतरीन ढंग से पूरी स्क्रिप्ट नरेट की है उन्हें अच्छा लगा। इस तरह मुझे ले लिया गया और मुझे से यह बात कुछ घण्टों के बाद ही बताई गई।mustafa_kiara-advani

बतौर हीरो लांच किये गए मुस्तफा को बॉक्स ऑफिस का कितना दबाब है?

मेरी फिल्म अभी-अभी पूरी हुई है और अभी हम लोग फिल्म की प्रोमोशन्स में व्यस्त है, इसी बारे में सोच रहे है। फिल्म अच्छी बनी है इसका अंदाजा हमें तभी हो गया था जब हमारे पहले ट्रेलर लांच को बहुत सपोर्ट मिला था सोशल मीडिया का।  और आज जबकि अक्षय कुमार की फिल्म ‘मोहरा’ का हिट गाना ‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’ लांच हुआ है -अक्षय कुमार के करकमलो द्वारा तो मुझे बहुत ही खुशी भी हुई है। इस गाने को भी बहुत सराहा जा रहा है। कुल मिला कर बॉक्स ऑफिस सफलता सभी को चाहिए होती है। बस आप लोगों की दुआ ही हमारी फिल्म सफल को करेंगी।

इस समय फिल्म को लेकर क्या सोच रहे हैं आप?

फिलहाल मुझे एक ही चाह है कि अब्बास मुस्तान की जोड़ी-ड्रामा, थ्रिल, सस्पेंस लेकर आते हैं किन्तु इस फिल्म में रोमांस का भी तड़का है , लोग उनकी फिल्मों से काफी अपेक्षा रखते है इस लिए मैं यही चाहता हूँ कि उनकी ऑडियंस फिल्म ‘मशीन’ से एंटरटेन हो कर ही जाये। और मेरी डेब्यू फिल्म है सफलता तो मुझे भी चाहिए है न जी। बहुत मेहनत की है। मैं इसलिए खुश भी हूँ। और जिस किसी ने भी यह फिल्म देखी है-यही कहा है – ‘फिल्म बहुत ही बेहतरीन बनी है।’ अब 17 मार्च को ही फिल्म का परिणाम हमे मिल पायेगा। फिलहाल मैंने फिंगर्स क्रॉस्ड कर रखी है। हंस कर मुस्तफा बोले।

अब्बास मुस्तान को प्रभावित करने के लिए आपने और क्या कुछ किया ?

मैंने सबसे पहले एन एस डी, के जाने माने एन के शर्मा से मिलकर कुछ ज्ञान लिया। सो जैसे ही यह घोषणा की गयी की मैं फिल्म ‘मशीन’ में बतौर हीरो लॉन्च किया जा रहा हूँ , मैंने तुरंत दिल्ली की टिकेट कटवाई और उनसे कुछ अनमोल शिक्षा लेने रवाना हो गया। जैसे ही मैं वापस मुम्बई आया तब अब्बास मुस्तान सर ने मुझे सेट पर बुलाया और वो भी मेरी परफॉरमेंस देख कर अंचभित हो गए।hussain-mustan_mustafa_aabbas

इस किरदार के लिए आपने क्या कुछ किया?

मैंने शर्मा जी से लगभग 6 से लेकर 9 घंटे तक रोजाना ट्रेनिंग भी ली है। दिन में लगभग 13-14 घंटे मैंने -डांस, जिमनास्टिक्स एवं मार्शल आर्टस की ट्रेनिंग भी ली है। मैं नहीं चाहता था किसी भी सीन में कमजोर परफॉरमेंस दूँ।

सेट पर अब्बास मस्तान के साथ कैसा रिश्ता रहा?

वही रिश्ता -जिस तरह से एक अभिनेता और निर्देशक का होना चाहिए। मुझे उन्होंने कभी भी बेटे की हेसियत से ट्रीट नहीं किया। सेट पर -मै उन्हें ‘सर’ कह कर ही पुकारता था और उनके हर सीन को जैसा वह दोनों चाहते थे वैसा ही पेशकश देने की कोशिश भी करता था।

फिल्म ‘मशीन’ में ऐसी कौन सी बात है जो दर्शकों को थियेटर तक खींच कर ले आएगी टाइटल कुछ अजीब नहीं लगता है?

जी नहीं मशीन हृदय को कहा गया है। जब कभी आप अपने मन की सुनते हैं तो जीवन में न केवल खुशी प्राप्त होती है आपको अपितु आप सफल भी होते है। हृदय को ‘मशीन’ माना गया है। फिल्म ‘मशीन’ कोई पुर्जे से सम्बन्धित रिलेट, नहीं करती है। मस्तिष्क से लिए हुए निर्णय से ज्यादा हृदय से लिए हुए निर्णय आपको सफल करते है। क्योंकि दिल सूफियाना होता है …..Machine

आप संयुक्त परिवार का हिस्सा है क्या कहना  चाहेंगे यूथ को इस बारे में?

मैंने पैदा होते ही संयुक्त परिवार जैसा माहौल देखा है। मुझे चाचा भतीजावाद नहीं मालूम है। ..बस वह मेरे पिता समान है यही जनता हूँ। और ‘चचेरे भाई’ जैसा शब्द भी मेरे शब्दकोष में नहीं है। …सिर्फ वो मेरा भाई है यही  मालूम है मुझे। यह फिल्म भी मुझे मेरे भाई की वजह से ही मिली है। संयुक्त परिवार में रहने से हम एक दूसरे के दुःख दर्द और खुशी सब आपस में बाँट कर सफलता की चरम सीमा को हासिल कर सकते है। पर यदि यू ही लड़ाई -झगड़े करते रहें तो अन्य कोई आकर फायदा ले लेता है। संयुक्त परिवार से अनेकों फायदे हैं। हमारी यूथ को भी अपने परिवार के साथ रहना चाहिए और माता-पिता एवं अन्य बड़ों का आदर करना चाहिए इससे बहुत खुशी मिलती है उन्हें और हमें उनका और ईश्वर का आशीर्वाद भी मिलता है।