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मूवी रिव्यू: फुल ब्वायफ्रेंड और गर्लफ्रेंड का प्यार लेकिन फिर भी ‘हाफ गर्लफ्रेंड’

बॉकस ऑफिसबॉक्स ऑफिसबॉलीवुड अपडेटसरिव्यूजश्याम शर्मा

रेटिंग***

इन दिनों आई रोमांटिक या लव स्टोरीज फिल्मों में प्यार मौहब्बत के जैसे मायने ही बदल गये हैं । बेशक आज की फिल्मों में सब कुछ है लेकिन उनमें बडे़ ही रूढ और एक हद तक सेल्फिश तरीके अपनाये जाने लगे हैं। उपन्यासकार चेतन भगत के बेस्ट सेलर नावल हाफ गर्ल पर आधारित मौहित सूरी द्धारा निर्देशित फिल्म ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ में भी यही सब खटकता है।

माधव झा यानि अर्जुन कपूर बिहार से दिल्ली आकर स्पोर्ट कोटे से दिल्ली यूनीवर्सटी में दाखिला लेता है। यहां उसे एक खूबसूरत लड़की रिया सोमानी यानि श्रद्धा कपूर दिखाई देती है। जो फर्राटेदार इंगलिश बोलती है, जबकि माधव इंगलिश में जीरो है लेकिन दोनों के एक जैसे शौक यानि बास्केट बाल उन्हें नजदीक ला देता है। माधव, रिया को प्यार करने लगता है लेकिन रिया उसे समझाती है कि बेशक हम एक दूसरे को पंसद करते हैं लेकिन मैं इतनी भी नजदीक नहीं हूं कि तुम्हें प्यार करने लगूं, हां मैं तुम्हारी हाफगर्लफ्रेंड जरूर बन सकती हूं। माधव को पता चलता है बेशक रिया एक बहुत बडे़ घर से है लेकिन उसके पेरेन्ट्स के लड़ाई झगड़ों की वजह से वो डिस्टर्ब रहती है। एक दिन उसकी शादी भी हो जाती है । माधव का जैसे सब खत्म हो जाता है। वो अपने गांव वापस आ जाता है जंहा उसकी मां एक स्कूल चलाती है। उस स्कूल में  लड़कियां नहीं पढ़ती क्योंकि लोगों का मत हैं कि वे पढ़ लिख कर क्या करेगी आखिर तो उन्हें शादी कर अपना घर ही संभालना है, लेकिन दूसरी सबसे अहम वजह ये भी है कि  वहां टॉयलेट न होने की वजह से भी लड़कियां  पढ़ने नहीं आती। उसी दौरान माधव को पता चलता है कि अमेरिका का धनकुबेर बिलगेट्स इस तरह के सकूलों को अपनी तरफ से अनुदान देता है । वो इस बारे में अप्लाई करता है तो बिलगेट्स की तरफ से उसका आमत्रंण स्वीकार कर लिया जाता है लेकिन शर्त यही है कि उसे उनके सामने भाषण अंग्रेजी में देना होगा। अचानक पटना में उसे रिया दिखाई देती है जो वहां काम के सिलसिले में हैं । उससे मिलकर पता चलता हैं कि अब वो अकेली है क्योंकि उसका तलाक हो चुका है, लिहाजा एक बार दोनों करीब आते हैं लेकिन इस बार माधव की मां सीमा विश्वास उनके बीच में आ जाती है और रिया को माधव से दूर रहने के लिये कहती है। माधव को अपने स्कूल के लिये बिलगेट्स की तरफ से मदद हासिल हो जाती है लेकिन रिया उससे एक बार फिर दूर हो जाती है और पीछे एक लैटर छोड़ जाती है कि उसे केंसर  है और वो सिर्फ तीन महीने की मेहमान है। माधव चाहता है कि वो उसके आखिरी दिनों में उसके नजदीक रहे लेकिन उसे तलाश कहां करे। अचानक उसे याद आता है कि रिया चूंकि बहुत अच्छा गाती थी और वो एक बार लाइव गाना चाहती थी इसके लिये अक्सर वो अमेरिका जाने की बात किया करती थी क्योंकि वहां के बार गाने के लिये मुफीद होते हैं। माधव अमेरिका आकर अपने कालेज के दोस्त विक्रांत मैसी की मदद से रिया को तलाश करता है जबकि विक्रांत का मानना है कि अब उसे रिया के साये का पीछा नहीं करना चाहिये क्योंकि वो तो कब की मर चुकी है वहीं उसे एक और लड़की मिलती है जो उसे प्यार करने लगती है। लेकिन माधव अपने विश्वास के रहते एक दिन रिया को ढूंढ ही लेता है। बाद में उसे पता चलता है कि उससे दूर जाने के लिये रिया ने उसे झूठ बोला था।चेतन भगत का उपन्यास काफी पॉपुलर हुआ लेकिन उससे बनी फिल्म में उतना सम्मोहन नहीं है । फिल्म जाने पहचाने प्यार मोहब्बत के दृश्यों से शुरू होती है लेकिन उसमें ‘हाफ गर्लफेंड’ का पंगा लगभग जबरदस्ती का लगता हैं क्योंकि जब रिया माधव के साथ डेट पर जा सकती है उसके साथ कॉफी पी सकती है उसे किस कर सकती है यहां तक उसके कमरे में अकेली प्यार मोहब्बत की बातें कर सकती है और तलाक के बाद  पटना सिर्फ उसके लिये आती है  यहां तक दस बार वो उसके साथ रहने का निर्णय लेते हुये उसे  तलाश करती हुई पटना तक आती है फिर भी वो ‘हाफ गर्लफेंड’ है।  फिल्म में कई बातें अजीब लगती हैं जैसे रिया के पेरेन्ट्स  पूरी तरह से आधुनिक अमीर और अंग्रेजी हैं। लेकिन उनके बीच अक्सर झगड़े होते हैं यहां तक मारपीट तक होती है। उसके बाद श्रद्धा भी कहती है कि शादी के बाद उस पर उसके पति और सास तक ने हाथ उठाया लिहाजा उसने उससे तलाक ले लिया, हजम नहीं होता। फिल्म में हिन्दी की बात की है लेकिन फिल्म में हिन्दी, अंग्रेजी के सामने हीन बनी दिखाई देती है। सबसे बड़ी बात कि हर बात इतने आराम और स्लो मोशन में कही गई है कि दर्शक बौर हो उठता है। फिल्म में कई लोगों का म्यूजिक है जो कहानी कहते हुये उसे आगे धकेलता लगता है। बस एक गीत ‘मैं फिर भी तुमको चाहूंगा’ याद रह जाता है । बैंकग्राउंड स्कोर के अलावा दिल्ली ,पटना और अमेरिका की लोकेशसं अच्छी हैं।

फिल्म में दो ही प्रमुख कलाकार हैं । अर्जुन कपूर ने एक बिहारी युवक के तौर पर भोजपुरी भाषा को लेकर काफी मेहनत करते हुये अपने रोल को पूरी तरह साकार किया है । श्रद्धा कपूर खूबसूरत लगने के अलावा बढि़या काम कर गई । एक दोस्त की भूमिका में विक्रांत मैसी अच्छे अभिनेता होने का सुबूत देता है। रिया चक्रवर्ती के लिये ज्यादा स्पेस नहीं था ।

फिल्म का नाम ‘हाफ गर्लफेंड’ हैं लेकिन फिल्म में दोनों का फुल ब्वायफ्रेंड,गर्लफेंड जैसा प्यार है लेकिन अर्जुन और श्रद्धा के लिये फिल्म देखी जा सकती है।